पश्चिम एशिया का नया मोड़ ईरान की सात दिवसीय योजना और होर्मुज का भविष्य

पश्चिम एशिया का नया मोड़ ईरान की सात दिवसीय योजना और होर्मुज का भविष्य

जब कूटनीति के रास्ते बंद दिखने लगते हैं, तब अचानक कोई नया प्रस्ताव पूरी बिसात पलट देता है। पश्चिम एशिया के सुलगते मैदान में ईरान ने एक ऐसा ही दांव चला है। तेहरान ने तनाव थामने के लिए पूरी तरह सात दिन का प्लान आगे रखा है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और अमेरिका के साथ रुकी हुई परमाणु वार्ताओं को पटरी पर लाने की बात कही गई है।

क्या है ईरान का यह सात दिवसीय फॉर्मूला

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने साफ किया कि अगर सामने वाला पक्ष कुछ शर्तों पर हामी भरता है, तो सातवें दिन के सूरज ढलते-ढलते होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता खोल दिया जाएगा। यह प्रस्ताव इस साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच बनी एक सहमति यानी एमओयू (MoU) के काफी करीब बताया जा रहा है। तेहरान चाहता है कि अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने से पहले इस पर मुहर लग जाए, ताकि कूटनीति को एक सही दिशा मिल सके।

अराघची की शर्तें और अमेरिका का रवैया

ईरानी विदेश मंत्री का रुख एकदम स्पष्ट है। उनका कहना है कि वॉशिंगटन को सबसे पहले ईरान के खिलाफ अपनी आक्रामक सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी। ईरान लगातार यह दोहरा रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और किसी भी बम बनाने की होड़ का हिस्सा नहीं है। लेकिन दिक्कत यह है कि जब भी बातचीत की टेबल पर माहौल बनता है, तो धरातल पर हमले शुरू हो जाते हैं।

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में खुलकर यह बात रखी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि हमने जून में एक समझौते पर दस्तखत किए थे, रूपरेखा तय हो गई थी और होर्मुज का रास्ता खुला हुआ था। इसके बावजूद अमेरिका और इजरायल ने सैन्य हमले किए, सर्वोच्च नेतृत्व को निशाना बनाया और हमारे वैज्ञानिकों को मौत के घाट उतार दिया। पेजेश्कियान का सीधा आरोप है कि अमेरिका पहले बमबारी करता है और फिर शांति की बात करता है।

अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे की खाई

कूटनीतिक गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन इस सात दिन के प्लान पर गंभीरता से विचार करेगा। दोनों देशों के बीच अविश्वास की दीवार इतनी गहरी हो चुकी है कि किसी भी समझौते पर टिके रहना लोहे के चने चबाने जैसा है। ईरान एक तरफ कूटनीतिक दरवाजे खोल रहा है, तो दूसरी तरफ उसकी सेनाएं और नेतृत्व किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह चौकस हैं।

यदि आने वाले कुछ दिनों में वॉशिंगटन की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आती है, तो यह सात दिवसीय योजना सिर्फ कागजी प्रस्ताव बनकर रह जाएगी। खेल अब पूरी तरह इस बात पर टिका है कि अमेरिका चुनावों से पहले तनाव कम करने का जोखिम उठाता है या फिर पश्चिम एशिया एक और बड़े टकराव की तरफ बढ़ता है।

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Naomi Campbell

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