न्यूयॉर्क में नेतन्याहू की गिरफ्तारी पर जोहरान ममदानी के यू-टर्न की असली वजह

न्यूयॉर्क में नेतन्याहू की गिरफ्तारी पर जोहरान ममदानी के यू-टर्न की असली वजह

चुनावी अभियान के दौरान बड़े-बड़े वादे करना आसान होता है, लेकिन सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही कानूनी हकीकत से सामना होना तय है। न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी के साथ ठीक यही हुआ। महीनों तक यह दावा करने के बाद कि अगर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू न्यूयॉर्क की धरती पर कदम रखेंगे तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा, ममदानी को आखिरकार पीछे हटना पड़ा है।

मंगलवार शाम को जारी एक वीडियो संदेश में ममदानी ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि न्यूयॉर्क शहर के पास अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत (ICC) के वारंट को लागू करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या ममदानी को इस कानूनी सीमा की जानकारी पहले नहीं थी, या फिर यह महज एक चुनावी पैंतरा था?

कानूनी सीमाएं और अंतरराष्ट्रीय संधियों का शिकंजा

जोहरान ममदानी ने अपने अभियान में अंतरराष्ट्रीय कानून और नैतिकता का हवाला देते हुए स्थानीय पुलिस के जरिए नेतन्याहू को हिरासत में लेने की बात कही थी। हालांकि, अमेरिका का कानूनी ढांचा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक नियम किसी भी अमेरिकी शहर को ऐसा करने की इजाजत नहीं देते।

सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल दोनों ही रोम संधि (Rome Statute) के हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत को कानूनी रूप से मान्यता नहीं देता। जब देश का संघीय कानून ही ICC के वारंट को स्वीकार नहीं करता, तो न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को कैसे गिरफ्तार कर सकता है?

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौता (UN Headquarters Agreement) भी इस मामले में एक बड़ा रोड़ा है। जब भी कोई विदेशी नेता संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने न्यूयॉर्क आता है, तो उसे कूटनीतिक छूट प्राप्त होती है। इस समझौते के तहत अमेरिकी स्थानीय या राज्य स्तर की पुलिस किसी विदेशी प्रतिनिधि को गिरफ्तार नहीं कर सकती।

जोहरान ममदानी का बयान और संघीय सरकार पर ठीकरा

अपने ताजा वीडियो संदेश में ममदानी ने कहा कि उनके प्रशासन ने उपलब्ध हर कानूनी रास्ते की समीक्षा की। इस गहन कानूनी समीक्षा के बाद यह साफ हो गया कि न्यूयॉर्क शहर के पास अपने स्तर पर वारंट तामील कराने की आजादी नहीं है।

"मेरी टीम ने कानूनी समीक्षा की और यह स्पष्ट है कि हमारे पास इस वारंट को लागू करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं है। हालांकि, संघीय सरकार के पास यह अधिकार है, और मैं उनसे अपील करता हूं कि वे ICC से जुड़ें और इस वारंट को तामील करें।"

ममदानी यहीं नहीं रुके। उन्होंने नेतन्याहू को "युद्ध अपराधी" करार दिया और साफ कहा कि उनका न्यूयॉर्क शहर में स्वागत नहीं है। लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ममदानी अब अपनी असमर्थता का ठीकरा वाशिंगटन पर फोड़ रहे हैं।

वाशिंगटन और डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख

ममदानी की इस मांग का वाशिंगटन में क्या हश्र होने वाला है, यह किसी से छिपा नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नेतन्याहू के खिलाफ अमेरिकी जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति साफ करते हुए लिखा था कि बेंजामिन नेतन्याहू जब तक अमेरिका में हैं, उन्हें किसी भी रूप में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत की वैधता को ही खारिज करता आया है और हाल ही में इस संस्था पर प्रतिबंध लगाने की बातें भी सामने आई हैं।

ऐसे में ममदानी का संघीय सरकार से नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का आग्रह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाता है।

चुनावी पैंतरा या नैतिक रुख

न्यूयॉर्क की राजनीति को करीब से देखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि ममदानी का यह पूरा बयान उनकी राजनीतिक साख को बचाने की एक कोशिश है।

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  1. समर्थकों को जवाब देना: ममदानी ने वामपंथी और फलस्तीन-समर्थक मतदाताओं के दम पर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की थी। अगर वे बिना किसी स्पष्टीकरण के चुप बैठ जाते, तो उनका अपना वोटर बेस नाराज हो जाता।
  2. जिम्मेदारी दूसरों पर डालना: अब वे अपने समर्थकों से कह सकते हैं कि उन्होंने तो पूरी कोशिश की, लेकिन संघीय कानून और वाशिंगटन के रुख के कारण वे हाथ बांधे बैठे हैं।
  3. राष्ट्रीय राजनीति में बने रहना: इस मुद्दे को हवा देकर ममदानी खुद को अमेरिकी राजनीति में एक प्रगतिशील और निडर नेता के रूप में पेश करने में सफल रहे हैं।

हालांकि, उनके आलोचकों का कहना है कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को पहले से पता होना चाहिए था कि शहर के मेयर के पास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और विदेशी नेताओं की गिरफ्तारी का अधिकार नहीं होता।

कूटनीतिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

ममदानी के इस रुख पर इजराइल और अमेरिकी नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया आई है।

संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने ममदानी पर पलटवार करते हुए कहा कि मेयर को न्यूयॉर्क की जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि विदेशी मामलों पर राजनीतिक नाटक करना चाहिए। उन्होंने कहा, "आपको न्यूयॉर्क वासियों की सेवा के लिए चुना गया है, हमास के प्रचार के लिए नहीं।"

वहीं, रिपब्लिकन नेताओं और कंजर्वेटिव टिप्पणीकारों ने भी ममदानी के बयानों को गैर-जिम्मेदाराना बताया है। उनका तर्क है कि एक शहर का मेयर अपनी सीमाएं लांघकर देश की विदेश नीति में दखल देने की कोशिश कर रहा है।

आगे का रास्ता क्या है

जोहरान ममदानी के इस यू-टर्न से एक बात शीशे की तरह साफ हो गई है: स्थानीय राजनीति की बयानबाजी जब अंतरराष्ट्रीय कानूनों से टकराती है, तो जीत हमेशा कानून और संधियों की ही होती है।

सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक होनी है। नेतन्याहू के न्यूयॉर्क आने की संभावना बनी हुई है। ममदानी अब शहर की पुलिस को गिरफ्तारी का आदेश तो नहीं दे सकते, लेकिन वे शहर में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव का माहौल जरूर बना सकते हैं।

आगे की रणनीति के रूप में, यदि आप अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के बीच के इस टकराव को समझना चाहते हैं, तो संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते और अमेरिका-ICC संबंधों से जुड़ी आधिकारिक रिपोर्टों का अध्ययन करें। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे को समझना ही इस पूरे विवाद की सही तस्वीर साफ करता है।

VM

Valentina Martinez

Valentina Martinez approaches each story with intellectual curiosity and a commitment to fairness, earning the trust of readers and sources alike.