अफगानिस्तान में बाढ़ से भारी तबाही और बेबसी का सच

अफगानिस्तान में बाढ़ से भारी तबाही और बेबसी का सच

पूर्वी अफगानिस्तान के नूरीस्तान प्रांत में अचानक आई बाढ़ ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 80 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सबसे खौफनाक बात यह है कि 100 से भी ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। जब बाढ़ का मलबे से भरा पानी नूरीस्तान की राजधानी पारुन में घुसा, तो लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

यह कोई पहली बार नहीं है जब इस देश ने ऐसी बर्बादी देखी है। हर बार बारिश आती है और पहाड़ों से बहता पानी दर्जनों जिंदगियों को लील जाता है। सवाल यह है कि आखिर अफगानिस्तान बार-बार ऐसी आपदाओं का शिकार क्यों बन रहा है?

नूरीस्तान में मलबे के नीचे जिंदगी की तलाश

सोमवार को जब नूरीस्तान के पहाड़ों पर तेज बारिश शुरू हुई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही घंटों में पूरा शहर पानी में डूब जाएगा। पारुन शहर में बाढ़ की वजह से दर्जनों कच्चे मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए। नूरीस्तान की प्रांतीय आपदा प्रबंधन टीम और स्थानीय लोग बिना आधुनिक उपकरणों के पत्थरों और मलबे को हटाकर अपनों को ढूंढ रहे हैं।

अफगानिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता यूसुफ हम्माद के अनुसार राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन लापता लोगों की संख्या को देखते हुए मरने वालों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

मौसम विभाग ने देश के 34 में से 10 प्रांतों में भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ की चेतावनी जारी की है। लोगों को नदी-नालों के पास न जाने की हिदायत दी गई है। पर जब घर ही नदी के किनारे बने हों, तो इंसान भागकर जाए भी तो कहां?

क्यों बार-बार आती है अफगानिस्तान में ऐसी भयंकर बाढ़

अफगानिस्तान की यह त्रासदी सिर्फ मौसम की मार नहीं है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं जो इस तबाही को हर साल कई गुना बढ़ा देते हैं।

जंग और कमजोर बुनियादी ढांचा

दशकों से चले आ रहे युद्ध ने अफगानिस्तान के इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बाढ़ से बचाव का कोई ठोस इंतजाम नहीं है। लोग मजबूरी में मिट्टी और गारे से घर बनाते हैं। जब पहाड़ों से पानी का तेज बहाव आता है, तो ये घर पानी का दबाव बिल्कुल भी झेल नहीं पाते।

बेतहाशा जंगलों की कटाई

नूरीस्तान अपने हरे-भरे पहाड़ों और जंगलों के लिए जाना जाता था। पिछले कुछ दशकों में गैर-कानूनी तरीके से पेड़ों की कटाई हुई है। जब पहाड़ों पर पेड़ नहीं होते, तो मिट्टी पानी को सोख नहीं पाती। बारिश का पानी सीधी ढलान से बहता हुआ नीचे बसे गांवों को अपने साथ बहा ले जाता है।

जलवायु परिवर्तन का असर

अफगानिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है जो कार्बन उत्सर्जन तो बहुत कम करते हैं, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बुरा असर झेल रहे हैं। कहीं महीनों तक सूखा पड़ता है, तो कहीं अचानक इतनी मूसलाधार बारिश होती है कि पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है।

Don't miss: fire in sarasota fl

केवल नूरीस्तान ही नहीं पूरा देश परेशान

अगर आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ नूरीस्तान की समस्या है, तो आप गलत हैं। इस साल की शुरुआत में भी अफगानिस्तान के उत्तरी और मध्य हिस्सों में आई बाढ़ में सौ से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई थी। वर्ष 2024 में वसंत के मौसम में आई बाढ़ में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

तालिबान प्रशासन के पास न तो पर्याप्त फंड है और न ही आधुनिक तकनीक। अंतरराष्ट्रीय मदद भी बहुत सीमित हो चुकी है। इस वजह से जब भी कोई आपदा आती है, आम नागरिक पूरी तरह बेबस नजर आते हैं।

आगे का रास्ता और सुरक्षा के व्यावहारिक कदम

इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोकना मुमकिन नहीं है, लेकिन सही कदम उठाकर जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है।

👉 See also: how far from manhattan
  • मौसम चेतावनियों पर तुरंत अमल करें: जब भी मौसम विभाग भारी बारिश या बाढ़ की चेतावनी जारी करे, निचले और जोखिम वाले इलाकों से तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।
  • कच्चे निर्माण से बचें: नदी या बरसाती नालों के मुहाने पर मिट्टी के मकान बनाने की गलती कभी न करें।
  • वृक्षारोपण को प्राथमिकता दें: पहाड़ी ढलानों पर पेड़ों की कटाई रोककर नए पौधे लगाना ही बाढ़ के बहाव को धीमा करने का एकमात्र स्थायी उपाय है।
  • आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना: स्थानीय स्तर पर बचाव टीमों को आधुनिक उपकरण और प्राथमिक चिकित्सा की ट्रेनिंग मिलना बेहद जरूरी है।

जब तक बुनियादी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और मजबूत निर्माण पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक हर बारिश के मौसम में ऐसी दर्दनाक खबरें आती रहेंगी।

NC

Naomi Campbell

A dedicated content strategist and editor, Naomi Campbell brings clarity and depth to complex topics. Committed to informing readers with accuracy and insight.