ईरान और अमेरिका के बीच इस शांति समझौते का असल सच क्या है

ईरान और अमेरिका के बीच इस शांति समझौते का असल सच क्या है

ईरान और अमेरिका के बीच दशकों से चली आ रही दुश्मनी में अचानक एक नया मोड़ आ गया है। लोग कह रहे हैं कि इस समझौते से ईरान की किस्मत रातोंरात बदल जाएगी। तेल का एक्सपोर्ट बढ़ेगा। अर्थव्यवस्था रॉकेट बन जाएगी। लेकिन क्या सच में सब कुछ इतना आसान है? जब आप हेडलाइंस से आगे बढ़कर असल गणित को देखते हैं, तो कहानी थोड़ी अलग नजर आती है।

हाल ही में हुए इस समझौते ने पूरी दुनिया के बाजारों को हिलाकर रख दिया है। कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) जो कुछ समय पहले आसमान छू रहा था, वह अचानक गिरकर $75 से $78 प्रति बैरल के आसपास आ गया है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है ईरान पर लगे प्रतिबंधों का हटना और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज का दोबारा खुलना। Meanwhile, you can read related stories here: Why Major Automakers Are Desperately Demanding A Permanent Ban On Chinese Cars.

तेल का खेल और ईरान की सुधरती हालत

ईरान के पास दुनिया का वन ऑफ द बिगेस्ट तेल भंडार है। सालों से अमेरिकी प्रतिबंधों ने इस देश का गला घोंट रखा था। ईरान अपना तेल चोरी-छिपे या भारी डिस्काउंट पर बेचने को मजबूर था। अब इस नए समझौते के बाद स्थितियां बदल रही हैं।

रास्ते खुल गए हैं। अमेरिकी नौसेना का ब्लॉकेड खत्म हो रहा है। इसका सीधा मतलब है कि ईरान अब खुलकर ग्लोबल मार्केट में अपना तेल बेच पाएगा। जानकारों का मानना है कि ईरान बहुत जल्द अपने दैनिक तेल उत्पादन को बढ़ा सकता है। यह उसकी अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी जैसा है क्योंकि ईरान की पूरी जीडीपी मुख्य रूप से तेल की कमाई पर ही टिकी है। To understand the bigger picture, we recommend the detailed report by Bloomberg.

क्या सचमुच ईरान रातोंरात अमीर हो जाएगा

ईमानदारी से कहें तो ऐसा सोचना जल्दबाजी होगी। तेल का प्रोडक्शन बढ़ाना कोई ऐसा बटन नहीं है जिसे दबाते ही काम हो जाए। सालों से बंद पड़े या कम क्षमता पर चल रहे तेल कुओं को दोबारा पूरी स्पीड में लाने के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी।

  • खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर: प्रतिबंधों की वजह से ईरान की तेल रिफाइनरियों और पाइपलाइनों की हालत बहुत खराब है। इन्हें अपग्रेड करने में अरबों डॉलर और महीनों का समय लगेगा।
  • ग्लोबल मार्केट का दबाव: ईरान जैसे ही मार्केट में ज्यादा तेल लाएगा, वैसे ही सप्लाई बढ़ जाएगी। सप्लाई बढ़ते ही तेल की कीमतें और गिरेंगी। यानी ज्यादा तेल बेचने के बाद भी शायद ईरान को उतनी कमाई न हो जितनी वह उम्मीद कर रहा है।
  • 60 दिनों का कठिन समय: यह समझौता अंतिम नहीं है। यह सिर्फ एक शुरुआत है। अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच तकनीकी बातचीत चलेगी। अगर इस दौरान किसी भी पक्ष ने पैर पीछे खींचे, तो पूरी डील रद्द हो सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस समझौते पर दस्तखत तो कर दिए हैं, लेकिन दोनों देशों के भीतर बैठे कट्टरपंथी इस डील से खुश नहीं हैं। अमेरिका में कुछ लोग इसे ईरान के सामने घुटने टेकना कह रहे हैं, तो ईरान के भीतर इसे एक थोपा हुआ समझौता माना जा रहा है।

इस डील का बाकी दुनिया पर क्या असर होगा

दुनियाभर के बाजारों के लिए यह एक बड़ी राहत है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करते हैं, यह खबर लॉटरी लगने जैसी है। तेल सस्ता होने से महंगाई पर लगाम लगेगी। पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो सकते हैं।

इस समझौते में एक $300 बिलियन के रिकंस्ट्रक्शन फंड की बात भी कही गई है। यह पैसा ईरान को दोबारा खड़ा करने में मदद करेगा। लेकिन यह सब तभी संभव है जब ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (Nuclear Enrichment) प्रोग्राम को रोकने पर पूरी तरह सहमत हो जाए। यह सबसे पेचीदा मुद्दा है और इस पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।

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अगर आप इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं, तो आपको केवल तेल के आंकड़ों को नहीं देखना चाहिए। भू-राजनीति की चालें बहुत अजीब होती हैं। आज जो दोस्त दिख रहे हैं, वे कल फिर आमने-सामने हो सकते हैं। ईरान के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने का यह सबसे बेहतरीन मौका है, बशर्ते वह इस 60 दिनों की बातचीत को सही सलामत पूरा कर ले।

ग्लोबल मार्केट पर नजर रखने वाले निवेशकों को अभी से अपनी रणनीति बदलनी होगी। आने वाले हफ्तों में एनर्जी स्टॉक्स और कमोडिटी मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अपनी नजरें स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या और वियना में होने वाली बैठकों पर बनाए रखें। अगला एक महीना तय करेगा कि दुनिया में तेल का बाजार किस दिशा में जाएगा।

NC

Naomi Campbell

A dedicated content strategist and editor, Naomi Campbell brings clarity and depth to complex topics. Committed to informing readers with accuracy and insight.