समुद्र के रास्ते ताइवान को घेर रहा है चीन क्यों 244 जहाजों की यह फौज है बड़ा खतरा

समुद्र के रास्ते ताइवान को घेर रहा है चीन क्यों 244 जहाजों की यह फौज है बड़ा खतरा

जब भी बीजिंग और ताइपे के बीच तनाव की खबरें आती हैं, मीडिया अक्सर फाइटर जेट्स और मिसाइलों की गिनती में उलझ जाता है। लेकिन असली खेल आसमान में नहीं, बल्कि गहरे समुद्र में चल रहा है। पिछले महीने ताइवान के आसपास के समुद्री इलाके में चीनी जहाजों की जो संख्या दर्ज की गई, उसने भू-राजनीतिक विश्लेषकों की नींद उड़ा दी है। तटरक्षक प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ एक महीने के भीतर 244 चीनी जहाजों की मौजूदगी दर्ज की गई। यह कोई सामान्य समुद्री आवाजाही नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

आंकड़ों का खेल और ग्रे-जोन युद्धनीति

अगर आप यह सोच रहे हैं कि ये सभी युद्धपोत हैं, तो आप गलत हैं। इन 244 जहाजों में से करीब साठ फीसदी पोत चीन के तटरक्षक बल यानी कोस्ट गार्ड के हैं। बीजिंग बहुत शातिर तरीके से अपनी नौसेना और तटरक्षक जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है। इसे रक्षा विशेषज्ञ "ग्रे-जोन वारफेयर" कहते हैं। ऐसी कार्रवाई जो खुले युद्ध की श्रेणी में नहीं आती, लेकिन धीरे-धीरे दुश्मन की सहनशक्ति को तोड़ देती है।

रोजाना औसतन आठ से दस चीनी जहाज ताइवान के जलक्षेत्र के मुहाने पर मंडराते रहते हैं। जब आप हर दिन इस तरह के मनोवैज्ञानिक दबाव का सामना करते हैं, तो आपकी रक्षा प्रणाली और संसाधनों पर भारी असर पड़ता है। ताइवान की सेना लगातार गश्त करने के लिए मजबूर होती है, जिससे उसके ईंधन और उपकरणों का तेजी से क्षरण होता है।

रिसर्च के नाम पर खुफिया जासूसी का जाल

इस पूरी हलचल में सबसे खतरनाक पहलू वो नागरिक 'रिसर्च शिप्स' हैं जो समुद्र में वैज्ञानिक अनुसंधान के नाम पर घूमते हैं। अमेरिकी नेवल वॉर कॉलेज के विशेषज्ञों का मानना है कि ये जहाज पानी के भीतर का वह डेटा जुटा रहे हैं जो भविष्य में पनडुब्बी युद्ध के दौरान काम आएगा। समुद्र की गहराई, तापमान, लवणता और पानी के नीचे की भू-संरचना की सटीक जानकारी होना पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए सबसे अहम होता है।

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चीन वैज्ञानिक खोजों की आड़ में असल में ताइवान के समुद्री तटों के आसपास का नक्शा तैयार कर रहा है। जब भविष्य में कभी नौसैनिक संघर्ष की स्थिति बनेगी, तो चीन के पास पानी के भीतर का हर एक राज़ होगा। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बार-बार इस बात को रेखांकित किया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के विमान और युद्धपोत लगातार मध्य रेखा को पार कर रहे हैं। उत्तरी, मध्य और दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में रोजाना घुसपैठ करना अब बीजिंग का नया सामान्य बन चुका है।

आगे क्या होगा

यह तनाव सिर्फ ताइवान तक सीमित नहीं है। ताइवान स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है। यदि यहां जरा सी भी चूक हुई, तो वैश्विक सप्लाई चेन ठप हो सकती है। ताइवान के पास अब आधुनिक रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ समुद्री निगरानी को और मजबूत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। बीजिंग की इस बढ़ती हुई समुद्री फौज का मुकाबला करने के लिए ताइवान को अपनी रणनीति में तेजी से बदलाव करना होगा।

NC

Naomi Campbell

A dedicated content strategist and editor, Naomi Campbell brings clarity and depth to complex topics. Committed to informing readers with accuracy and insight.