पटरियों की खस्ताहाली और दशकों पुरानी सिगनलिंग व्यवस्था ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में बड़े पैमाने पर यात्रियों की जान जोखिम में डाल दी है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुआ रहमान बाबा एक्सप्रेस का हादसा कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह उस चरमराती हुई परिवहन व्यवस्था का एक और खौफनाक नतीजा है जिसे सुधारने के दावे तो बार-बार किए जाते हैं, पर जमीन पर कुछ नहीं बदलता।
कराची से पेशावर जा रही यह ट्रेन जब पंजाब के शेरशाह इलाके के पास सुबह करीब 5:15 बजे पटरी से उतरी, तो कई परिवार हमेशा के लिए बिखर गए। शुरुआती रिपोर्ट्स और एसोसिएटेड प्रेस (AP) के आंकड़ों के मुताबिक, इस भीषण दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को मुल्तान के निश्तर अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टरों की टीमें लगातार इलाज में जुटी हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस तरह के हादसों के बाद सियासत तो खूब गर्माती है, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी रहती है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस दुखद घटना पर संवेदनाएं जताते हुए हरसंभव इलाज के निर्देश दे दिए हैं, मगर सवाल यह है कि इस तरह के जानलेवा हादसों को रोकने के लिए पुख्ता नीति कब बनेगी?
पाकिस्तान रेलवे पिछले कई दशकों से भारी वित्तीय घाटे, निवेश की कमी और अप्रचलित ट्रैक टेक्नोलॉजी से जूझ रहा है। साल 2023 में भी इसी तरह सिंध प्रांत में एक पैसेंजर ट्रेन के पटरी से उतरने से करीब तीस लोगों की मौत हो गई थी और नब्बे से ज्यादा लोग घायल हुए थे। जब तक बुनियादी ढांचे को आधुनिक नहीं बनाया जाता, तब तक हर सफर एक जुआ बनकर रह जाएगा।
बचाव दल मौके पर राहत कार्य पूरा करने में जुटे हैं और प्रशासनिक स्तर पर जांच बिठा दी गई है। लेकिन यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा यह संकट सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी व्यवस्था की नाकामी का आईना है।