यमन में क्यों सुलग रहा है बारूद और हूती विद्रोहियों पर सेना का शिकंजा

यमन में क्यों सुलग रहा है बारूद और हूती विद्रोहियों पर सेना का शिकंजा

जब लाल सागर की लहरों के बीच मिसाइलें गरजती हैं, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का दिल बैठ जाता है। यमन की सेना ने हाल ही में देश के तीन अलग-अलग प्रांतों में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। यह कोई मामूली झड़प नहीं है। यह उस सुलगते हुए मध्य-पूर्व संघर्ष का हिस्सा है जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को बंधक बना रखा है।

अगर आप सोच रहे हैं कि यमन का यह संघर्ष सिर्फ एक स्थानीय बगावत है, तो आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं।

तीन प्रांतों का खेल और हूती विद्रोहियों की रणनीति

यमन की सेना द्वारा तीन प्रमुख प्रांतों में की गई यह कार्रवाई एक सोची-समझी सैन्य रणनीति का हिस्सा है। हूती विद्रोहियों ने पिछले कुछ महीनों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हथियारों का जो जखीरा इकट्ठा किया था, उसे नेस्तनाबूद करना अब बेहद जरूरी हो गया था। जब आप रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों को देखते हैं, तो पाते हैं कि इन ठिकानों से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडरा रहा था।

सेना के इन हमलों ने यह साफ कर दिया है कि यमन की सरकार अब चुप बैठने के मूड में नहीं है।

लाल सागर का संकट और वैश्विक असर

हूती विद्रोही केवल यमन की राजनीति तक सीमित नहीं हैं। लाल सागर और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर इनके लगातार हमलों ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। शिपिंग कंपनियों को मजबूरन अफ्रीका का लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है। इससे ईंधन का खर्च बढ़ा है और हर रोज करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
  • बीमा लागत आसमान छू रही है।
  • क्षेत्रीय अस्थिरता लगातार गंभीर रूप लेती जा रही है।

क्या इस संघर्ष का कोई अंत है

हकीकत यह है कि दशकों से चली आ रही इस आंतरिक कलह ने यमन को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में ला खड़ा किया है। जब तक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय ताकतें मिलकर कोई ठोस राजनीतिक समाधान नहीं निकालतीं, तब तक इस तरह के सैन्य हमले ही एकमात्र विकल्प नजर आते हैं। लेकिन क्या इससे शांति आएगी? शायद नहीं। यह सिर्फ एक अस्थायी विराम है, स्थायी शांति का मार्ग इससे बहुत दूर है।

आपको यह समझना होगा कि यमन का यह युद्ध केवल बंदूक और बारूद की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह प्रभाव और सत्ता की वह खींचतान है जिसमें आम नागरिकों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है। हालात बदल रहे हैं, और आने वाले हफ्तों में इस मोर्चे पर और भी बड़े सैन्य बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

NC

Naomi Campbell

A dedicated content strategist and editor, Naomi Campbell brings clarity and depth to complex topics. Committed to informing readers with accuracy and insight.